Monday, 24 August 2015

एकजुट हुआ जैन समाज,उच्च न्यायालय के फैसले का शान्तिपूर्ण विरोध किया,सौंपा ज्ञापन

संथारा पर हाईकोर्ट के फैसले के विरोध में जैन समाज के हजारों लोगों का मौन जुलूस
जैन समाज ने निकाला विशाल मौन जुलूस, हजारों लोगों की उमड़ी भीड़ राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री  के नाम सौंपा ज्ञापन
जगदीश सैन पनावड़ा 
बाड़मेर/बायतु । माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा जैन धर्म की सदियों पुरानी परम्परा, आस्था के प्रतीक व आत्म कल्याण के मार्ग संथारा/संलेखना को आत्महत्या के रूप में पारिभाषित करने के विरोध में सोमवार को बायतु जैन समाज ने अखिल भारतीय जैन समाज के आह्वान पर जैन श्रीसंघ के बैनर तले ऐतिहासिक मौन जुलूस में अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान व काम-काज बन्द रख जैन समाज की भावनाओं व आस्था को आहत् करने वाले माननीय उच्च न्यायालय के फैसले का शान्तिपूर्ण विरोध किया। 

 वही महावीर इंटरनेशनल के अध्यक्ष राकेश जैन, जैन श्री संघ के अध्यक्ष महेंद्र चोपड़ा, भागीरथ जैन,  सहित कई गणमान्य नागरिकों की अगवाई में मौन जुलूस रवाना हुआ । जैन समाज द्वारा आयोजित विशाल मौन जुलुस समत्ता भवन से तुलसी मार्केट होते हुए पंचायत समिति होकर उपखण्ड कार्यालय पंहुचा। 

जैन समाज के मौन जुलूस में जैन समाज के सैकड़ो महिला पुरूषों ने भाग लेकर संथारा को आत्म हत्या बताने के फैसले का विरोध प्रदर्शित किया । जहां जैन समाज की ओर से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री के  नाम उपखण्ड अधिकारी को ज्ञापन सौंपा।

राकेश जैन 
महावीर इंटरनेशनल के अध्यक्ष राकेश जैन ने बताया कि माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय के जैन धर्म के आत्म कल्याण के मार्ग संथारा को आत्म हत्या देने सकल जैन समाज की भावनाएं आहत् हुई । सम्पूर्ण जैन में फैसले को लेकर रोष व्याप्त है । जैन समाज की धार्मिक भावनाओं पर कुठराघात हम कतई स्वीकार नही करेंगें । हमें आगे जरूरत पड़ी तो हम आन्दोलन की राह भी अख्तियार करेंगे । 

एकजुट हुआ जैन समाज 
संथारा/संलेखना को आत्महत्या के रूप में पारिभाषित करने के विरोध में सोमवार को जैन समाज के विभिन्न गच्छों, संस्थाओं, मण्डलों सहित कई अग्रिम संगठनों के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं व सदस्यों ने एकजुटता दिखाते हुए विशाल मौन जुलूस के आयोजन को सफल बनाया । मौन जुलूस में हजारों की तादाद में नागरिकों ने शिरकत की । सरकारी कर्मचारियों व वकीलों ने रखा कार्य अवकाश जैन समाज की ओर से सोमवार को मौन जुलूस व जैन समाज के प्रतिष्ठानों के बन्द के आयोजन के तहत् जैन समाज के सरकारी कर्मचारियों ने भी माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा जैन धर्म की सदियों पुरानी परम्परा को आत्म हत्या बताने के विरोध में आकस्मिक अवकाश पर रहकर अपना विरोध जताया । 

जैन व्यापारियों ने रखे प्रतिष्ठान बन्द
जैन समाज के शहर व मण्डी व्यापारियों ने माननीय न्यायालय के आहत करने वाले फैसले के विरोध में अपने कारोबार व प्रतिष्ठान बन्द रख अपना विरोध जाहिर किया  । 

संथारा को लेकर सड़कों पर उतरा जैन समाज ...




बाड़मेर,जैसलमेर सहित उपखण्ड मुख्यालय पर सौपे ज्ञापन
रिव्यु की मांग को लेकर निकाला मौन जुलुस
बाड़मेर 24 अगस्त। संथारा को लेकर कोर्ट के फैसले को रिव्यु करने की मांग को लेकर जब बाड़मेर में जैन समाज की रैली प्रारम्भ हुई तो लगा की समाज को सदियों पुरानी परम्परा, आस्था के प्रतीक के प्रति कितना लगाव है और इस परम्परा को आत्महत्या के रूप में पारिभाषित करने के विरोध में समाज में कितना रोश है। जहंा से भी मौन जुलुस निकला उस जगह जाम लग गया। हजारो की संख्या में युवा और महिलाओं ने जुलुस में मौर्चा सम्भाल रखा था। संथारा को लेकर पिछले कई दिनो से अलग अलग तरीके से रोश प्रकट किया जा रहा है इसी कडी में सोमवार को बाड़मेर जैन समाज ने जैन श्रीसंघ के बैनरतले ऐतिहासिक मौन जुलूस निकाला और अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान बन्द रखकर भावनाओं व आस्था को आहत् करने वाले माननीय उच्च न्यायालय के फैसले का रोश प्रकट किया। मौन जुलूस का आगाज साध्वी सुलक्षणाश्री,साध्वी तीर्थगुणाश्री व साध्वी संघप्रभाश्री आदि ठाणा के मांगलिक प्रवचन के साथ हुआ।  मौन जुलुस स्थानीय जैन न्याति नोहरे से जैन श्री संघ के अध्यक्ष सम्पतराज बोथरा, बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन, नगर परिषद सभापति लूणकरण बोथरा, नाकोड़ा जैन तीर्थ टस्ट अध्यक्ष अमृतलाल जैन सहित कई गणमान्य नागरिकों की अगवाई में मौन जुलूस रवाना हुआ जो षहर के मुख्य मार्गो से होता हुआ जिला कलक्टर परिसर पहुंचा  राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व राजस्थान की मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपे। जैन श्रीसंघ के अध्यक्ष सम्पतराज बोथरा ने बताया कि माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय के जैन धर्म के आत्म कल्याण के मार्ग संथारा को आत्म हत्या देने सकल जैन समाज की भावनाएं आहत् हुई । सम्पूर्ण जैन में फैसले को लेकर रोष व्याप्त है। जैन समाज की धार्मिक भावनाओं पर कुठराघात हम कतई स्वीकार नही करेंगें। हमें आगे जरूरत पड़ी तो हम आन्दोलन की राह भी अख्तियार करेंगे। इसी कडी में बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन ने कहा कि संथारा को लेकर जैन समाज की सदियों पुरानी परम्परा को गलत रूप से पारिभाशित किया गया है जो कि गलत है उन्होने कहा कि हमारी भावनाओं और धर्म से जुडे मामले में इस तरह के निर्णय असहनीय पीड़ा दायक है। उन्होने मांग रखी की माननीय न्यायालय के इस फैसले पर रिव्यु लेकर इस निर्णय को तुरन्त प्रभाव से निरस्त करें।
प्रतिनिधि मण्डल सौंपे ज्ञापन-बाड़मेर सकल जैन समाज की ओर से संथारा को आत्महत्या घोषित करने के विरोध में दस सदस्यीय प्रतिनिधि मण्डल ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपे तथा प्रशासन को जैन समाज  की भावनाओं से अवगत करवाया।
सरकारी  कर्मचारियों व वकीलों एवं सभापति ने रखा अवकाश-जैन समाज की ओर से सोमवार को मौन जुलूस व जैन समाज के प्रतिष्ठानों के बन्द के आयोजन के तहत् जैन समाज के सरकारी कर्मचारियों ने भी माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा जैन धर्म की सदियों पुरानी परम्परा को आत्म हत्या बताने के विरोध में आकस्मिक अवकाश पर रहकर अपना रोश व्यक्त किया। इसी तरह जैन समाज के वकीलों ने सोमवार को अपने काम काज बन्द रख अपना विरोध प्रदर्शित किया वही परिशद् के सभापति लुणकरण बोथरा ने भी अवकाष रखा।
व्यापारियों ने रखे प्रतिष्ठान बन्द-जैन समाज के शहर व मण्डी व्यापारियों ने माननीय न्यायालय के आहत करने वाले फैसले पर रोश प्रकट करते हुए  अपने कारोबार व प्रतिष्ठान बन्द रख अपना किया।
जहां से निकला जुलुस लग गया जाम-स्थानीय जैन न्याति नोहरे प्रारम्भ हुए जुलुस जहां जहां पहुंचा वहा जाम लग गया जिससे यातायात पुलिस को बडी मष्कत करनी पडी। जब जुलुस स्टेषन रोड पहुंचा तो एक बारगी गाडीयों की लम्बी लम्बी कतारे लग गई और इतना लम्बा जुलुस देखकर हर कोई दंग रह गया।
उपखण्ड मुख्यालयांे पर भी सौपे ज्ञापन-संथारा के फैसले पर रिव्यु करने की मांग को लेकर उपखण्ड मुख्यालय बायतु,चैहटन,धोरीमन्ना सहित आस पास के दर्जनो गांवो से जैन समाज के प्रतिनिधि मण्डल की ओर से उपखण्ड अधिकारी,तहसीलदार,ग्रामसेवको के माध्यम से ज्ञापन सौप कर रोश प्रकट किया। कई उपखण्ड मुख्यालय पर जैन समाज की ओर से प्रतिश्ठान बन्द रखे और रैली निकाल कर अपना रोश प्रकट किया।
षांतिपूर्वक जुलूस निकाल प्रकट किया रोश-संथारा व संलेखना पर राजस्थान उच्च न्यायालय की ओर से लगाई गई रोक से जैन धर्म की प्राचीनकाल से चली आ रही मान्यता संथारा व संलेखना क्रिया को गैर कानूनी घोषित कर कानूनन अपराध माने जाने के फैसले को लेकर जैसलमेर संकल जैन श्री संघ व जैन महावीर नवयुवक मंडल के तत्वावधान में महावीर भवन से रवाना होकर सोमवार सुबह निकाली ऐतिहासिक रैली में महिला मंडल के साथ ही ग्रामीण क्षैत्रों सहित जैन समाज ने षातिपूर्वक जुलस निकालकर आसनी रोड़, गोपा चैक, जिन्दाणी चैकी, गांधी चैक हनुमान चैराहा होते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुॅचे। जहां जिला प्रषासन के अतिरिक्त जिला कलेक्टर भागीरथ षर्मा को मुख्यमंत्री व राज्यपाल राजस्थान सरकार के नाम का ज्ञापन सौंपे। महेन्द्र भाई बापना ने बताया कि रैली में षामिल लोग हाथों में संथारे के समर्थन कि लिखी पटिकाएं लिए नवकार महामंत्र का जाप करते हुए पैदल चल रहे थे। ज्ञापन में राज्य सरकार से संथारा संलेखना पर पुनःविचार याचिका राजस्थान उच्च न्यायालय में दायर कर धार्मिक अधिकारों कि सुरक्षा के लिए पहल करने का निवेदन किया गया।

संस्कृत विधालय 16 साल से एकल शिक्षक के भरोसे

राकेश जैन 
बायतु/ गिड़ा क्षैत्र ग्रांम पंचायत खोखसर पुर्व मे़ं स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विधालय संस्कृत सऊओ की ढाणी पिछले 16 वर्षो से एकल  शिक्षक के भरोसे है  तो विधालय में शिक्षा की क्या कल्पना की जा सकती है ! वर्ष 1999 से इस विधालय में मात्र एक ही शिक्षक है और आठ कक्षाए एक मात्र शिक्षकं के भरोसे है एेसी स्थिति में रूचिनुसार बच्चो की पढाई नही हो पाती है एकल शिक्षक को शिक्षण व्यवस्था के अलावा सरकारी कागजों की खानापुर्ति भी करनी पड़ती है !   आठ कक्षाओ को पढाने के बाद इतना सबकुछ करना मुश्किल हो रहा है !  कार्यालय का काम तो समय पर पुरा चाहिए एेसी स्थिति में दिनो दिन शिक्षा का स्तर कमजोर होता जा रहा है और संस्कृत विधालय के बच्चों के अभिभावको का कहना है की हम बच्चो को घर से विधालय भेज देते है पर विधालय में शिक्षको की कमी के कारण हमारे बच्चो के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा हैं ! शिक्षक को कभी अवकाश पर जाने कि स्थिति में बच्चो के लिए भी अघोषित अवकाश  शिक्षकं को करना पड़ता हैं वो कभी कभार दो या तीन दिनो से भी ज्यादा हो जाता है ! उक्त विधालय की स्थापना  प्राथमिक विधालय के रूप में 1999 में हुई तथा सन् 2007 में उच्च प्राथमिक विधालय क्रमोन्नत हुआ पर आज दिन तक किसी ने इस विधालय की शुध तक नही ली हैं ! ग्रांमिणो ने कही बार स्थाऩीय जनं प्रतिनिधियो के साथ-साथ संस्कृत विभाग के आला अधीकारीयो को भी अगवत करवाया परन्तु आज दिन तक कोई कारवाई नही हुई विधालय की वही स्थिति बनी हुई है !.

कौन  सुने , किनको सुनाएं 
संस्कृत शिक्षां विभाग का जिला  मुख्यालय बाड़मेर पर कोई विभागीय कार्यालय नही है , इसलिए इन विधालयों की हालात दयनीय है ! जोधपुर कार्यालय से सुध लेने वाला कोई अधिकारी यहॉ तक नही पहुंचता है ,ऐसी स्थिति में ग्रांमिण अपने बच्चों का बर्बाद हो रहे भविष्य का दुखड़ा किसको सुनाए और कौन सुने क्योकि यहॉ कोई सुनने वाला भी नही है !

" इस विधालय की स्थिति दयनीय है , अकेले शिक्षक के लिए पुरी आठ कंक्षाओ की व्यवस्था संभालना मुश्किल है , एसी स्थिति में बच्चे का भव़्यष़्य खराब हो रहा है इस को लेकर संस्कृत शिक्षां विभाग को कई बार लिखित शिकायते भी की , लेकिन आज दिन तक कोई भी शिक्षक की नियुक्ती नही हुई है ! और अभी में सांसद कर्नल सोनाराम चौधरी से मिला हुं तब सांसद ने आश्वासन दिया है की शीघ्र ही कारवाई की जाएगी ! समाजसेवी ,दिने खॉ खोखसर,    
                           
इस विधालय कि हालत को लेकर  अधिकारीयो को कही बार अगवत करवाया फिर भी आज दिन तक कोई कारवाई नही हुई है  !
वगताराम लुखा सरपंच खोखसर पुर्व


 सस्कृत सऊओ की ढाणी विधालय में एक ही शिक्षक कार्यरत है एेसे मे बच्चो के भवि़ष्य के साथ खीलवाड़ हो रहा हैं और जनं प्रतिनिधियो व विभागीय अधिकारीयो को कही बार अगवत करवाया  पर कोई कारवाई नही हुई है  विधालय की एसी स्थिति पर शीघ्र ही सरकार को ध्यान देना चाहिएं
चुनाराम जाखड़ एडवोकेट राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर 

Saturday, 22 August 2015

आयुर्वेद चिकित्सक भर्ती का रास्ता निकालने का प्रयास


हाईकोर्ट ने आयुर्वेद चिकित्सक पद के लिए निकली दो अलग-अलग भर्तियों के कारण उत्पन्न विवाद का समाधान निकालने का प्रयास शुरू कर दिया है
जयपुर। हाईकोर्ट ने आयुर्वेद चिकित्सक पद के लिए निकली दो अलग-अलग भर्तियों के कारण उत्पन्न विवाद का समाधान निकालने का प्रयास शुरू कर दिया है। इसके लिए दोनों भर्तियों के लिए अलग-अलग चयन सूची तैयार कर पेश करने को कहा गया है, लेकिन हिदायत दी है कि पहली सूची में आने वाले अभ्यर्थियों के नाम दूसरी सूची में शामिल नहीं किए जाएं। न्यायाधीश अजय रस्तोगी व न्यायाधीश अनुपिन्दर सिंह ग्रेवाल की खण्डपीठ ने अरूण कुमार राजपूत व अन्य की चार याचिकाओं पर यह अंतरिम आदेश दिया है। कोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता श्याम आर्य से कहा है कि एक जून 2013 व एक जुलाई 2013 को अलग-अलग निकली आयुर्वेद चिकित्सक भर्तियों की चयन सूची अलग-अलग तैयार कर 10 सितम्बर से पहले कोर्ट में पेश की जाएं। अब सुनवाई 10 सितम्बर को होगी। याचिकाओं के अनुसार पहले भर्ती के तहत 785 पदों के लिए आवेदन मांगे गए, अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थी नहीं मिलने के कारण 778 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई। इस भर्ती में कोर्ट के आदेश पर उन अभ्यर्थियों को भी शामिल किया गया, जिनकी डिग्री तय तारीख तक पूरी नहीं हुई और कुछ ही दिन में पूरी होने वाली थी। इसी बीच एक जुलाई 2013 को फिर भर्ती निकाली गई, उसकी अंतिम तारीख से पहले पिछली भर्ती में कोर्ट के अंतरिम आदेश से शामिल किए गए अभ्यर्थी भी पात्र हो गए। कुछ अभ्यर्थी दोनों में चयनित हो गए। इसके बाद यह विवाद कोर्ट पहुंच गया। कोर्ट ने इसी मामले में दोनों भर्तियों के लिए अभ्यर्थियों को मिले अंकों के आधार पर अलग-अलग चयन सूचियां तैयार करने को कहा है। इनमें अधिक अंक वालों को पहली सूची में रखने को कहा है और पहली सूची में आने वालों को दूसरी सूची से अलग रखने के निर्देश दिए हैं।

तम्बाकू मुक्त क्षाबंधन पर्व पर बहन लेगी भाई से शपथ पत्र- डाॅ बिस्ट


बाड़मेर 22 अगस्त। रक्षाबंधन एक ऐसा पावन पर्व है जिसमे किसी प्रकार की ओपचारिकता निहित नहीं होती है द्य बहने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उनके दीर्धआयु होने की कामना करती है भाई अपनी बहन की हर परिस्थिति में साथ देने का वचन देते है तथा उपहार भी देते है। मुख्य चिकित्सा एव स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ एस के सिंह बिस्ट ने बताया की राज्य सरकार द्वारा रक्षाबंधन के पावन पर्व पर बहनों के द्वारा अपने भाइयो से तम्बाकू नामक जहर का पुरजोर विरोध कर इसे मानव समाज से खत्म करने के संकल्प लिए जाने को प्रोत्साहित करने के लिये तम्बाकू मुक्त रक्षाबंधन पर्व प्रारम्भ किया जा रहा है। डाॅ बिस्ट ने बताया की इस पर्व के अन्तर्गत यह संदेश गांव, शहर में घरेलू स्तर पर प्रचारित किया जाये की रक्षाबंधन के अवसर पर बहने अपने भाइयो से तम्बाकू का सामाजिक बहिष्कार करने का संकल्प ले। जिला आईईसी समन्वयक राकेश भाटी ने बताया की लिए गये संकल्प का विवरण सादे कागज पर नाम पते सहित लिखकर राज्य तम्बाकू नियन्त्रण प्रकोष्ठ, निदेशालय चिकित्साए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सेवायेए राजस्थानए जयपुर को 15 सितम्बर तक साधारण डाक द्वारा भिजवाया जाना हैए राज्य स्तर पर प्राप्त होने वाले सभी संकल्पों में से ड्रा निकालकर पांच बहनों को राज्य स्तर पर सम्मानित किया। भाटी ने बताया की तम्बाकू मुक्त रक्षाबंधन पर्व में आशा सहयोगिनी की अहम भूमिका रहेगी।


बिना व्याख्याताओं के कैसे हो पढ़ाई

313 छात्र 9 शिक्षकों के भरोसे, नहीं हैं विज्ञानं व्याख्याता एंव प्रोगशाला।  
अंग्रेजी का पद खत्म,गणित भी समझाने वाला नहीं,कक्षा कक्ष भी छोटे आधे बच्चे बाहर बैठकर करते हैं पढाई। 
जगदीश सैन पनावड़ा/राकेश जैन बायतु 
बाड़मेर/बायतु। उपखण्ड क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पनावड़ा को क्रमोनत करके विज्ञानं संकाय तो बना लिया मगर व्याख्याताओं  के पद खाली होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई ख़राब हो रही  हैं।

प्रधानाचार्य ने बताया की क्रमोनत होने के बाद विद्यालय में 19 पद स्वीकृत हुए थे मगर इनमें से 9 पदो पर नियुक्ति हुई हैं। इस विद्यालय में 313 छात्र-छात्राएं अध्यनरत हैं पद रिक्तता के कारण बच्चो की पढाई प्रभावित हो रही हैं।  विद्यालय को विज्ञानं संकाय में क्रमोनत करने के बाद ना तो बच्चो को विज्ञानं पढ़ाने वाला हैं और ना ही प्रियोगशाला हैं। विद्यार्थियों ने बताया की हमें विज्ञानं समझाने लिए कोई नहीं हैं पहला टेस्ट हो चूका हैं मगर हम खुद उलझन में हैं अगर व्याख्याता के साथ प्राोग्शाला होती तो पढ़ाई समझ में आती अध्यापकों की कमी से हमारे परिजन भी परेशान हैं।

यह पद हैं खाली 
व्याख्याता 3 पद जीव विज्ञानं, रसायन विज्ञानं, भौतिक विज्ञानं तीनों पद खाली।
वरिष्ठ अध्यापक 1 पद वो भी खाली।
अध्यापक लेवल प्रथम पद 2  दोनों खाली पद।
 शारीरिक शिक्षक भी निल हैं।
प्रवेश सहायक पद 1 यह भी खाली।
पुस्तकालय अध्यक्ष  पद 1  यह भी खाली हैं।
कनिष्ट लिपिक पद 1  यह भी खाली।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पद 2  दोनों खाली हैं।

इनकी जुबानी 
विज्ञानं संकाय के सभी पद रिक्त अंग्रेजी का एक भी पद होने से बच्चो की पढाई कमजोर पड़ रही हैं। " रामावतार मीणा प्रधानाचार्य रा. उ. मा.वि. पनावड़ा "

हमारे विद्यालय को विज्ञानं संकाय में क्रमोनत तो कर दिया मगर विभाग ने विज्ञानं पद खाली छोड़ दिए जिससे हमारी पढ़ाई चौपट हो रही हैं।  "सुमित्रा गोदारा कक्षा ग्यारह "

एक तो शिक्षकों की कमी ऊपर से प्रोगशाला नहीं होने से हमें अध्यन करने में दिक्क़त हो रही हैं विभाग हमारी भावना समझे और जल्दी से शिक्षकों को लगाकर हम पर कृपा करें।  "देवाराम पंवार कक्षा ग्यारह "

मुझे विद्यालय में स्टाफ की कमी का पता हैं जल्द ही बात करके नियुक्ति करवाने का प्रयास करेंगे। "चनणाराम भील सरपंच पनावड़ा "

       

व्याख्यताओं के पद खाली कैसे हो पढाई

जगदीश सैन पनावड़ा 
बाड़मेर/बायतु । उपखंड मुख्यालय से महज 18 कि.मी.दूर स्थित ग्राम पंचायत सेवनियाला के रा.उ.मा.वि.(विज्ञान वर्ग) के व्याख्यताओं के सभी पद खाली है जिससे  299 छात्रो का भविष्य अंधकार मे है । छात्रों का कहना है कि विद्यालय में अध्यापको की कमी के कारण हमारी पढाई चौपट हो रही है । कार्यवाहक प्रधानाचार्य ने बताया कि विद्यालय में अध्यापको के 20 पद सर्जित हैै जिसमे से केवल 7 पदो पर ही अध्यापक कार्यरत है, शेष 13 पद खाली है । एक ओर जहां सरकार सभी को शिक्षा को बढावा दोनो का वादा कर रही है वही दुसरी ओर विद्यालयों मे अध्यापको की कमी से पढाई का स्तर बिगडता जा रहा है । सरकार की ओर से स्कुलों मे नामांकन बढाने व गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा देने की भले ही लाख कोशिश की जा रही है लेकिन धरातल पर सरकार की योजना सफल नही हो पा रही है । विद्यालय में प्राथमिक स्तर एवं उ.मा.स्तर के एक भी अध्यापक नहीं है। अध्यापको की कमी के चलते स्कुल में अध्यापन कराने वाले शिक्षक भी परेशान है । विज्ञान वर्ग से संचालित विद्यालय में प्रधानाचार्य का भी पद रिक्त है।
इनका कहना है:
"विद्यालय मे व्याख्यताओं की कमी से हमारी पढाई चौपट हो रही है। "पुष्पा छात्रा कक्षा ग्यारहवीं
"2 मिहने बीत गए है व्याख्याताओं की कमी के कारण पढाई शुरू नहीं हो पाई है। परिक्षाए नजदीक है,हमारे साथ धोखा हो रहा है। "सुरेन्द्र छात्र कक्षा ग्याहरवीं

"सीनियर कक्षाओं मे पढाने के लिए एक भी व्याख्याता नहीं है,जिससे हमारी पढाई प्रभावित हो रही है । प्रशासन को जल्दी ही व्याख्याता लगाने चाहिए । "कविता छात्रा कक्षा ग्याहरवीं

"स्थानीय विद्यालय में व्याख्याता(गणित वर्ग) के सभी पद रिक्त है एवं प्राथमिक स्तर के भी सभी पद रिक्त है जिससे कक्षा ग्याहरवीं व प्राथमिक स्तर की कक्षाओं के संचालन मे परेशानी आ रही है । "
रजनीश व्यास कार्यवाहक प्रधानाचार्य रा.उ.मा.वि. .सेवनियाला