Wednesday, 5 August 2015

आत्मशोधन का द्वार है तपस्या- साध्वी संघप्रभा


बाड़मेर 05 अगस्त। स्थानीय तेरापंथ भवन, भिक्षु कुंज में आचार्य श्री महाश्रमण जी की शिष्या साध्वी श्री संघप्रभाजी के सान्निध्य में बहिन आषा गोलेच्छा की अठाई की तपस्या का अभिनन्दन समारोह मनाया गया। कार्यक्रम का प्रारम्भ साध्वी मृदुप्रभा ने ‘आए हम आए अपने घर भीतर आए’ के गीत द्वारा मंगलाचरण से किया। रूपेषजी मालू, मीठालाल चैपड़ा, उर्मिला मेहता, तेरापंथ महिला मंडल व हिना गोलेच्छा  वीणा मेहता व प्रियंका गोलेच्छा आदि ने मधुर संगान किया। पारसमल  गोलेच्छा ने कहा कि मै अपना सौभाग्य मानता हूं कि मेरे घर में तपस्या  के षुभ परमाणु आषा बहन ने फैलाएं है। आज मै।ंअपने जीवन संगिनी  को षुभकामनाएं दे रहा हूं। सन्दीप गोलेच्छा ने विचार रखे। साध्वी संघप्रभाजी के अपने उद्बोधन में कहा कि - तपस्या से परिषोधन होता है, तपस्या साधना पद्धति का मूल तत्व है। तपस्या के  साथ कषाय मुक्ति साधना करने से आत्मषोधन हो सकता है। तपस्या भी एक प्रयोग है। तपस्या जैन धर्म क बहुत बड़ा धन है। साध्वी अखिलयषा, मृदुप्रभा, कर्तव्ययषा, प्रांषुप्रभा ने ‘‘अभिनन्दन कर तपस्या का मन सबका ही पुलक रहा है’’ समवेत स्वरों में संगान किया। तपस्वी बहिन का अभिनन्दन तपस्वी श्रीमती लीला मालू ने तपस्या के द्वारा ही किया। कार्यक्रम का संचालन साध्वी श्री प्रांषुप्रभा ने किया।


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